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Tuesday, 13 March 2018

आओ भक्तों दुआ करो






दुआ करो कि भारत से अंधविश्वास दूर हो जाए।
दुआ करो कि हम ऐसे ही अंधविश्वास फैलाते रहें फिर भी लोग हमें प्रगतिशील मानते रहें।

दुआ करो कि ‘हालांकि न तो दुआ में कोई ख़तरा है न मेहनत न संघर्ष’ फिर भी हमें दुआ तक न करनी पड़े।
हालांकि दुआ करते वक़्त असल में करना क्या पड़ता है, किसीको भी नहीं पता।
दुआ करो कि किसीको यह पता भी न चले वरना लोगों को यह भी पता चल जाएगा कि धार्मिक, धर्मपिरपेक्ष, कट्टरपंथी और प्रगतिशील एक ही थैली के चट्टे-बट्टे हैं।

दुआ करो कि हम ज़िंदगी-भर ऐसे ही बदबूदार चुटकुले छोड़ते रहें फिर भी लोग हमें संजीदा और गंभीर और सीरियस और... मानते रहें।
इन सब शब्दों का एक ही मतलब है ठीक वैसे ही जैसे दुआ और अंधविश्वास का।
दुआ करने में कैसी शर्म ! क्या लिहाज़ !
इसके लिए न तो ताक़त चाहिए न बुद्धि।

और मूर्खता-
हां वो तो ज़र्रे-ज़र्रे, कण-कण में मौजूद है।
दुआ करो कि हमें कभी अक़्ल न आए।

वरना हम दुआ कैसे करेंगे !?

रोज़गार वालो, नौकरी छोड़ो, दुआ करो, 
इससे बेहतर कोई रोज़गार नहीं

दुआ करो कि छेड़खानी बंद हो जाए
बलात्कार ख़त्म हो जाए
दुआ करो कि
अपने-आप ग़ज़ल और नज़्म हो जाए

आप ख़ामख़्वाह समझ रहे हैं कि महापुरुषों ने स्वतंत्रता-संग्राम किया था
उन्होंने तो बस दुआ की थी
और अंग्रेज़ चले गए
फिर इतिहास भी बन गया

हालांकि, अगर आपके लिए होना संभव हो तो,
आप हैरान होंगे,
कि उन्होंने कभी इसलिए दुआ क्यों नहीं की
कि अंग्रेज़ कभी आएं ही न !

भगतसिंह, फांसी का फंदा छोड़ो वापस आओ
दुआ करो 
ग़लतियां हो जातीं हैं
पर उन्हें दुआ करके सुधारा भी तो जा सकता है

दुआ करो
यह कहीं भी की जा सकती है
दुकान में, मकान में, मैदान में,
वर्दी में, हमदर्दी में, सरदी में, जल्दी में

रसोई में, युक्ति में, मुक्ति में,
सुस्ती में, चुस्ती में, फुर्ती में, कुर्ते में, कुर्ती में
हवाई जहाज में, गंगा के बहाव में
भीड़ के दबाव में, ज़बरदस्ती के प्रभाव में
परदे पर, अकेले में 
जोश में, थकेले में

यह कभी भी की जा सकती है
होश में, मदहोशी में
शोर में, ख़ाम़ोशी में
नदी के किनारे पर
चालू चौबारे पर

दुआ करो कि गौरी लंकेश, नरेंद्र दाभोलकर, जज लोया, सुनंदा पुष्कर के हत्यारे पकड़े जाएं
लेकिन इससे पहले यह दुआ करो कि कोई यह न पूछ बैठे 
कि पहले तुमने यह दुआ क्यों नहीं की
कि इनकी हत्या कभी हो ही न  

 दुआ करो कि लोग समझ न जाएं
अंधविश्वास हटाने से पहले
ख़ुद ही फैलाना भी पड़ता है

एक तरफ़ धजरंगी हवन कर रहे हैं
दूसरी तरफ़ बुद्धिजीवी दुआ कर रहे हैं
कौन सबसे बड़ा है
आप ही बताओ



इसके लिए 
अक़्ल भी नहीं चाहिए
यहां तक कि ब्लैकमनी भी नहीं लगती

दुआ करो कि सब्ज़ी अपने-आप बन जाए
दुआ करो कि दाल अंगीठी पर रखे बिना गल जाए

दुआ करो कि बिना दांतों के खाना चब जाए
दुआ करो कि बिना आंतों के खाना पच जाए

दुआ करो कि बिना डॉक्टर के ऑपरेशन हो जाए
दुआ करो कि बिना दवाई के सैटिसफ़ैक्शन हो जाए
दुआ करो कि डॉक्टर को ऑपरेशन के लिए
ऑपरेशन तक न करना पड़े
दुआ करो कि अंधविश्वास दूर करने में
हमको कोई को-ऑपरेशन तक न करना पड़े

दुआ करो कि हम बिना हवाई जहाज के विदेश पहुंच जाएं
दुआ करो कि एक जेब में अंधविश्वास दूसरी में प्रगतिशीलता रखकर
हम कहीं भी पहूंच जाएं

दुआ करो कि दुनिया में किसीको दुआ के अलावा कुछ भी न करना पड़े
न लिखना पड़े न पढ़ना पड़े

दुआ करो कि लोगों के बिना पढ़े डिग्रियां मिल जाएं
दुआ करो कि लोगों की सारी डिग्रियां ग़ायब हो जाएं
अरे! जब दुनिया में दुआ से ही सब होना है
तो आज ही क्यों न सब हो जाए !? 

यह कैसी दुआ है जो पहले पासपोर्ट-वीज़ा का इंतेज़ार करती है
फिर हवाई जहाज़ का, फिर अच्छे डॉक्टर का अच्छे हॉस्पीटल का
फिर देखती है कि डॉक्टर सही कर रहा है कि ग़लत
अगर सही कर रहा है तो मैं जाकर लग जाती हूं
अगर ग़लत कर रहा है तो चुपके-से, छुप-छुपके लौट आती हूं

अरे आज या तो डॉक्टर रहेगा या दुआ
आज फ़ैसला हो ही जाए
अभी और कितने बरस हम परदा खुलने का इंतज़ार करेंगे
क्या हम भी बस सस्पेंस में ही मरेंगे !?

अरे अब आ ही गए हैं तो कुछ तो कर जाएं
प्रगतिशील ज़्यादा अंधविश्वासी होते हैं
या अंधविश्वासी ही बाई चांस प्रगतिशील निकल आते हैं
कम-अज़-कम यही पता कर जाएं 



दुआ करो कि बिना फ़िल्म के फ़िल्म बन जाए
दुआ करो कि बिना प्रमोशन फ़िल्म चल जाए
मैं तो कहता हूं दुआ करो कि बिना फ़िल्मों में काम किए स्टार बन जाएं
और बिना अभिनय किए ऑस्कर मिल जाए

बिना खाने के पेट भर जाए
बिना विज़ुअल बनाए
किसानों की समस्याएं हल हो जाएं

मुझे ख़ुशी है कि दुआ आज दस हज़ार साल की हो चुकी
हालांकि यह नहीं पता कि इससे हुआ क्या है




-संजय ग्रोवर
13-03-2018


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