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Thursday, 24 September 2015

भगवान करे!

व्यंग्य/कविता



भगवान करे कि आपको बीमारी न हो
अगर हो जाए तो भगवान करे कि ठीक हो जाए

भगवान करे कि आपके घर में आटा आ जाए
भगवान करे कि आपके घर में घी आ जाए
भगवान करे कि उसका परांठा बन जाए

भगवान करे कि आपको खाना हज़म हो जाए
अगर न हो तो भगवान करे कि आपको क़ब्ज़ न हो 
अगर हो जाए तो भगवान करे कि खुल जाए

भगवान करे कि आज कहीं लूटमार न हो
भगवान करे कि आज कहीं भ्रष्टाचार न हो
भगवान करे कि आज कहीं बलात्कार न हो

क्योंकि भगवान ही तो सब कुछ करता है
हे भगवान फिर हम किसलिए हैं
भगवान करे हम हुआ ही न करें

और जब हम ही न हों तो कौन बीमार होगा और कौन ठीक होगा
किसको ठीक करेगा भगवान किसकी ज़िंदगी से खेलेगा भगवान

फिर भगवान भी क्यों हुआ करे ?

भगवान दरअस्ल है भी कहां ?

मैं भी तो भगवान से ज़रा-सा टाइमपास कर रहा था

-संजय ग्रोवर
25-09-2015



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